Manoj Kumar: हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्टर और फिल्म मेकर मनोज कुमार ने 87 साल की उम्र में अपनी अंतिम सांस ली. इस मौके पर आज जानते हैं भारत कुमार की जिंदगी के कुछ अनसुने किस्सों के बारे में.
04 April, 2025
Manoj Kumar: मनोज कुमार हिंदी सिनेमा का वो नाम है जिसने इंडस्ट्री में एक लंबा सफर तय किया. एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर मनोज कुमार को लोग भारत कुमार के नाम से भी जानते हैं. मजह 19 साल की उम्र में हीरो बनने का सपना लिए दिल्ली से मुंबई आए मनोज कुमार का असली नाम हरिकिशन गोस्वामी था. हालांकि, इस नाम से उन्हें शायद ही कोई जानता होगा. 1957 में उनकी पहली फिल्म रिलीज हुई जिसका नाम था ‘फैशन’. आपको जानकर हैरानी होगी कि 19 साल की उम्र में उन्होंने इस फिल्म में 80 साल के भिखारी का रोल किया. इसके बाद उन्होंने कई बड़ी फिल्मों में छोटे-मोटे रोल किए, लेकिन मनोज को एक बड़े ब्रेक का इंतजार था.
जब पर्दे पर हीरो बनकर आए मनोज
साल 1961 में फिल्म ‘कांच की गुड़िया’ बतौर हीरो मनोज कुमार की पहली फिल्म थी. हालांकि, इस फिल्म ने उनके करियर को कोई खास मुकाम नहीं दिलवाया. इसके बाद उन्होंने ‘नकली नवाब’, ‘बनारसी ठग’, ‘अपना बना के देखो’ और ‘सुहाग सिंदूर’ जैसी कई फिल्मों में काम किया. लेकिन मनोज को पहचान मिली साल 1962 में रिलीज हुई फिल्म ‘हरियाली और रास्ता’ से. इस फिल्म ने उनके करियर का ही रास्ता बदल दिया. फिर तो उन्होंने ‘वो कौन थी’, ‘गुमनाम’, ‘शहीद’, ‘अपने हुए पराए’, ‘हिमालय की गोद में’, ‘दो बदन’, ‘पत्थर के सनम’, ‘उपकार’, ‘नीलकमल’ और ‘पूरब और पश्चिम’ जैसी हिट फिल्मों की झड़ी लगा दी.
जब भारत कुमार पड़ा नाम
साल 1964 में मनोज कुमार के करियर में नया मोड़ आया जब उनकी फिल्म ‘शहीद’ रिलीज हुई. फिल्म भगत सिंह की जिंदगी पर बनी थी. यहां से मनोज कुमार की छवि देशभक्ति फिल्मों के हीरो के रूप में बननी शुरू हो गई. फिर तो उन्होंने ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘शोर’, ‘क्रांति’, ‘मैदान ए जंग’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ जैसी देशभक्ति से लबरेज फिल्मों की लाइन ही लगा दी. इसके बाद से फिल्म इंडस्ट्री में उनका नाम ही भारत कुमार पड़ गया.
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जब अमिताभ का बनाया करियर
कम ही लोग जानते हैं कि मनोज कुमार ही वो शख्स थे जिन्होंने अमिताभ बच्चन के डूबते करियर को बचाया था. दरअसल, जब अमिताभ बच्चन ने फिल्मों में अपने करियर की शुरुआत की थी तब उनकी कई फिल्में एक के बाद एक फ्लॉप हुईं. निराश होकर अमिताभ ने मुंबई छोड़कर अपने मां-बाप के पास दिल्ली जाने का फैसला किया. उस वक्त मनोज कुमार ने अमिताभ को रोककर उन्हें अपनी फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ में काम करने का मौका दिया.
नेता भी पसंद करते थे मनोज की फिल्में
इंदिरा गांधी से लेकर अटल बिहारी बाजपेई और लाल बहादुर शास्त्री जैसे बड़े नेता भी मनोज कुमार की फिल्मों को पसंद करते थे. उनकी फिल्म ‘शहीद’ की स्क्रीनिंग के लिए तो उस वक्त के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री खुद आए थे. फिल्म देखने के बाद शास्त्री जी ने मनोज कुमार को अपने घर दावत पर बुलाया और कहा कि मैं चाहता हूं कि तुम मेरे नारे ‘जय जवान, जय किसान’ पर फिल्म बनाओ. ये आइडिया मनोज कुमार को भी काफी पसंद आया. दिल्ली से मुंबई आते वक्त वो अपने हाथ में डायरी और पेन लेकर बैठे. जब रेलगाड़ी बॉम्बे सेंट्रल पर रुकी तब तक मनोज कुमार फिल्म ‘उपकार’ की कहानी लिख चुके थे. इस फिल्म में मनोज कुमार ने ना सिर्फ काम किया बल्कि इसे डायरेक्ट भी किया. फिल्म के साथ-साथ ‘उपकार’ का गाना ‘मेरे देश की धरकी सोना उगले’ भी सुपरहिट हुआ. 7 मिनट 14 सैकेंड का ये गाना आज भी सबसे बेहतरीन देशभक्ति गीतों में टॉप पर आता है.
कैसे पड़ा मनोज कुमार नाम
इस बात का जिक्र हम पहले ही कर चुके हैं कि मनोज कुमार का असली नाम हरिकिशन था. बचपन में उन्होंने एक फिल्म देखी जिसका नाम था ‘शबनम’ जिसमें दिलीप कुमार हीरो थे. उस फिल्म में दिलीप कुमार के किरदार का नाम था मनोज कुमार. उस फिल्म में हरिकिशन को मनोज कुमार नाम और किरदार इतना पसंद आया कि उन्होंने तय कर लिया कि जब भी वो हीरो बनेंगे तब अपना नाम मनोज कुमार ही रखेंगे. खैर, अब हिंदी सिनेमा का ये दिग्गज हमारे बीच में नहीं रहा, लेकिन मनोज कुमार हमेशा अपने चाहने वालों के दिल में रहेंगे.
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