Introduction
PM Modi Decisions : केंद्र की मोदी सरकार को 10 साल से भी ज्यादा का समय हो चुका है. ऐसे में इस दौरान उनकी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं जिनका असर आम जनता पर भी दिखाई दिया और भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों को भी संतुष्ट किया है. मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसलों ने न केवल सालों पुराने बेड़ियों से आजादी दिलाई है बल्कि देश की राजनीति को भी एक अलग दिशा में मोड़ दिया है. इनमें राम मंदिर निर्माण, आर्टिकल 370, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC), तीन तलाक और वक्फ जैसे बिल शामिल हैं. और अब जब भारतीय जनता पार्टी यानी BJP ने अपने इन लक्ष्यों को हासिल कर लिया है तो सवाल यह उठता है कि सरकार का अगला कदम क्या होगा? वहीं, इसके पहले आइए जानते हैं कि मोदी सरकार ने किन-किन ऐतिहासिक बिलों को पास कर पार्टी को एक अलग मुकाम तक पहुंचाया है.
Table Of Content
- राम मंदिर
- तीन तलाक
- अनुच्छेद 370
- नागरिकता संशोधन कानून (CAA)
- यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)
- वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025
- क्या होगा BJP का अगला एजेंडा
- यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का पूर्ण कार्यान्वयन
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर
राम मंदिर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में राम मंदिर निर्माण शामिल हैं. उपलब्धियों की अगर बात की जाएगी तो इसमें सबसे पहले अयोध्या राम मंदिर का नाम शामिल होगा. मोदी के नेतृत्व में राम मंदिर का निर्माण हुआ. करीब 550 साल के बाद जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया, तो मोदी सरकार ने राम मंदिर निर्माण की दिशा में तेजी से काम किया और 22 जनवरी, 2024 को राम लला अपने गर्भगृह में विराजमान हो गए. यही, नहीं मोदी जी ने अपने कार्यकाल में वाराणसी के काशी विश्वनाथ में कॉरिडोर का निर्माण भी कराया.
तीन तलाक

वहीं, दूसरी ओर तीन तलाक का फैसला मुस्लिम महिलाओं के लिए लिया गया उल्लेखनीय काम है. पीएम मोदी के कार्यकाल की दूसरी सबसे बड़ी उपलब्धि और साहसिक कदम की अगर चर्चा की जाएगी, तो उसमें तीन तलाक का नाम जरूर शामिल होगा. मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के दंश से आजादी दिलाई. उस समय के कानून मंत्री रहे रविशंकर प्रसाद ने 21 जून, 2019 को लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल, 2019 पेश किया था. मोदी सरकार ने इसे कानून का रूप दे दिया और तीन तलाक की प्रथा को खत्म कर इसमें सजा का प्रावधान भी बनाया. इस फैसले ने मोदी को और भी सशक्त बनाया.
अनुच्छेद 370

नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के तीसरे सबसे ऐतिहासिक फैसले की बात करें, तो जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना है. धारा 370 से जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा मिला हुआ था. देश में रहते हुए भी वहां का अलग शासन और झंडा हुआ करता था. लेकिन मोदी सरकार के इस फैसले के बाद विशेष दर्जा समाप्त हो गया और उसे केंद्रशासित राज्य बना दिया गया.
नागरिकता संशोधन कानून (CAA)

तीन तलाक के बाद से नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लाना मोदी सरकार का एक ऐतिहासिक फैसला रहा है. जब ये बिल को पास किया गया था तो लोगों ने अफवाहों का ढेर लगा दिया था पर सच्चाई कुछ और ही थी. ये बिल सीधे तौर पर मुसलमानों को प्रभावित नहीं करता है. देश में मुस्लिम संगठनों ने इस कानून का प्रति सबसे तीखा विरोध किया. यूपी में इस कानून के विरोध में हिंसा भी हुई. पुलिस को फायरिंग भी करनी पड़ी. दिसंबर 2019 में पारित नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का उद्देश्य के चलते पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देना था. इस कानून के दायरे से मुस्लिमों को बाहर रखा गया जिसके बाद से मुस्लिमों ने इसी को लेकर जमकर विरोध किया था और इस कानून को विभाजनकारी और भेदभाव वाला बताया. CAA को 9 दिसंबर, 2019 को पेश कर 11 दिसंबर, 2019 को पास किया गया, जिसके बाद देश भर में हिंसक और शांतिपूर्ण दोनों तरह के विरोध प्रदर्शन हुए. मुस्लिम संगठनों ने बिना समझे इस कानून को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के साथ जोड़ा. इस वजह से मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा फैली, देश भर में व्यापक प्रदर्शन हुए. मुस्लिम समुदाय और विपक्ष ने इस कानून को भेदभावपूर्ण माना और कहा कि यह कानून धर्म के आधार पर नागरिकता को परिभाषित करता है.
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यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) भारतीय जनता पार्टी सरकार का अहम एजेंडा रहा है. BJP अपने घोषणापत्र में इसे लेकर अक्सर जिक्र करती आई है. केंद्रीय स्तर पर UCC अभी तक कानून नहीं बना है, लेकिन मोदी सरकार ने इसे लागू करने की दिशा में इरादा जताया है. BJP शासित उत्तराखंड ने UCC लागू कर दिया है. वहीं, गुजरात इस कानून को लागू करने की तैयारी में है. वहां इस कानून की आवश्यकता का आकलन करने के लिए सीएम भूपेंद्र पटेल ने एक कमेटी बनाई है. UCC सभी धर्मों के लिए एक समान रुख अपनाता है फिर चाहे वो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार से ही जुड़ा हुआ मामला ही क्यों न हो. सरकार का तर्क है कि यूसीसी से लैंगिक समानता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलेगा. संविधान के अनुच्छेद 44 में भी इसका उल्लेख है. लेकिन मुस्लिम संगठनों, खासकर AIMPLB ने इसे मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) पर हमला बताया है और कहा है कि ये कानून धार्मिक अधिकारों में अतिक्रमण है.
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025

अब इन कदमों के बाद नरेन्द्र मोदी की सरकार ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को दोनों सदनों में पास करवा दिया है. इस विधेयक को पहली बार अगस्त 2024 में लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन वक्फ बोर्ड के प्रबंधन और संपत्तियों में सुधार के लिए है, इसमें गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने, संपत्ति सर्वेक्षण और पारदर्शिता जैसे प्रावधान हैं. वहीं, केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि इस कानून का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों में भ्रष्टाचार और दुरुपयोग को रोकना है और साथ ही महिलाओं और पिछड़े मुस्लिमों को लाभ पहुंचाना है.
क्या होगा BJP का अगला एजेंडा

आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के पास एजेंडों की पोटली है. जिनका राजनीतिक धार्मिक और सामाजिक असर आम लोगों पर भी पड़ता है. वहीं, मथुरा और वाराणसी का मुद्दा कुछ ऐसा ही है. संघ के बड़े नेता दत्तात्रेय होसबले ने हाल ही में अपने बयान से ऐसे संकेत भी दिए हैं. हालांकि, इस मुद्दे को भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणापत्र में शामिल नहीं किया है लेकिन जल्द ही इसका समाधान चाहती है.
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का पूर्ण कार्यान्वयन

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का मतलब है कि भारत में सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करना है फिर चाहे उनका धर्म, जाति, लिंग या समुदाय कुछ भी हो. इस कोड ने इसे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे मामलों में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए मौजूद व्यक्तिगत कानूनों को खत्म करके एक एकीकृत कानूनी ढांचा लाने की वकालत करता है. UCC का विचार संविधान के अनुच्छेद 44 से लिया गया है, जो राज्य को “नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने” का निर्देश देता है. वहीं, उत्तराखंड में इसके लागू होने के साथ ही गुजरात में इसकी तैयारी की जा रही है.
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) भारत में एक आधिकारिक रजिस्टर है, जिसमें देश के वैध नागरिकों के नाम और उनकी पहचान से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाती है. इसका मुख्य उद्देश्य अवैध प्रवासियों की पहचान करना और उन्हें देश से बाहर करना है. आपको बता दें कि असम एकमात्र राज्य है, जहां NRC को अपडेट किया गया है. इस प्रक्रिया को साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई थी और 31 अगस्त, 2019 को अंतिम NRC सूची प्रकाशित की गई थी.
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