Home National क्या सरकार निजी संपत्तियों का कर सकती है अधिग्रहण? जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया आदेश

क्या सरकार निजी संपत्तियों का कर सकती है अधिग्रहण? जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया आदेश

by Divyansh Sharma
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Supreme Court On Private Property: CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में 9 जजों की पीठ ने कहा है कि निजी संपत्ति को सामुदायिक संपत्ति नहीं घोषित किया जा सकता है.

Supreme Court On Private Property: क्या राज्य कोई सरकार जनता की भलाई के लिए निजी संपत्तियों का कानून के तहत अधिग्रहण कर सकती है? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना 45 साल पहले दिया फैसला पलट दिया है.

CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में 9 जजों की पीठ ने 7:2 से फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी निजी संपत्ति को सामुदायिक संपत्ति नहीं घोषित किया जा सकता है.

Supreme Court On Private Property: 1983 के फैसले को भी गलत माना

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि कुछ खास संपत्तियों को सरकार सामुदायिक संसाधन मानकर आम लोगों के हित में इस्तेमाल कर सकती है. सुनवाई के दौरान पीठ ने 1978 के कर्नाटक राज्य बनाम रंगनाथ रेड्डी मामले में दिए गए फैसले पर असहमति जताई है.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने संजीव कोक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी बनाम भारत कोकिंग कोल लिमिटेड और अन्य के साल 1983 के मामले में दिए गए फैसले को भी गलत माना गया.

बहुमत ने माना कि पुराने फैसले के समय 70 के दशक में समाजवादी अर्थव्यवस्था की ओर झुकाव था. हालांकि बाद में 90 के दशक के दौरान बाजार और भारतीय अर्थव्यवस्था ऊपर उठने लगी थी.

पीठ ने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की दिशा शुरू से किसी विशेष प्रकार की अर्थव्यवस्था से बहुत अलग रही है. पीठ ने तर्क दिया कि पिछले 30 सालों के दौरान भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है.

ऐसे में पीठ ने साल 1978 के कर्नाटक राज्य बनाम रंगनाथ रेड्डी मामले में जस्टिस कृष्ण अय्यर के फैसले से असहमति जताई.

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क्या है महाराष्ट्र सरकार का MHADA कानून?

बता दें कि 1978 के कर्नाटक राज्य बनाम रंगनाथ रेड्डी मामले में जस्टिस कृष्ण अय्यर ने फैसला दिया था कि किसी भी निजी संपत्ति पर सरकार की ओर से कब्जा किया जा सकता है.

9 जजों की पीठ में भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जेबी पारदीवाला, जस्टिस हृषिकेश रॉय, बीवी नागरत्ना, मनोज मिश्रा, सुधांशु धूलिया, राजेश बिंदल, सतीश चंद्र शर्मा और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल हुए. इनमें से बी.वी. नागरत्ना और सुधांशु धूलिया ने असहमति व्यक्त की.

बता दें कि पीठ उन 16 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें साल 1992 में मुंबई स्थित POA यानी प्रॉपर्टी ओनर्स एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका भी शामिल है.

इसमें POA ने महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डिवेलपमेंट एक्ट (MHADA) की निजी संपत्तियों पर कब्जा करने वाले अधिनियम को चुनौती दी गई है. MHADA के कानून 1976 के मुताबिक राज्य सरकार अधिगृहीत इमारतों का अधिग्रहण कर सकती हैं, अगर उस इमारत या जमीन पर रहने वाले 70 प्रतिशत लोग इस अनुरोध पर सहमति देते हैं.

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