UP News : समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस के दावे को खारिज करते हुए आरोप लगाया है.
UP News : उत्तर प्रदेश में निलंबित IAS अधिकारी के मामले में सियासी हलचल तेज हो गई है. इस कड़ी में SP के मुखिया अखिलेश यादव ने इसे लेकर यूपी सरकार को घेरा है. उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस के दावे को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में शीर्ष अधिकारी और सत्तारूढ़ पार्टी के नेता बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं.

क्या है पूरा मामला?
IAS अभिषेक प्रकाश को डिफेंस कॉरिडोर से जुड़े भूमि घोटाले में भी फंस सकते हैं. इसमें लखनऊ के तत्कालीन जिलाधिकारी समेत 18 अधिकारियों को पकड़ा गया है. राजस्व परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रजनीश दुबे ने पूरी रिपोर्ट तैयार करने के बाद आरोपपत्र दायर किया.
मीडिया से बातचीत के दौरान कहीं ये बात
अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि ऐसी खबरें हैं कि एक IAS अधिकारी, जिसके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, वो छिपा हुआ है. इससे सरकार की तथाकथित ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर गंभीर सवाल उठते हैं. हालांकि. अखिलेश ने इस दौरान किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा IAS अभिषेक प्रकाश की ओर था जिन्हें हाल ही में निलंबित किया गया है. प्रकाश इन्वेस्ट यूपी के सीईओ पद पर थे और एक प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के मामले में उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा है. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि BJP नेताओं और नौकरशाहों ने अवैध रूप से संपत्ति अर्जित की है, जमीन पर अतिक्रमण किया है और वित्तीय कदाचार में लिप्त हैं.

राम मनोहर लोहिया को दी श्रद्धांजलि
अखिलेश यादव का ये बयान राम मनोहर लोहिया की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब
देते समय आया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए यादव ने कहा कि भगवा वस्त्र पहनने से कोई सच्चा योगी नहीं बन जाता. शासन के लिए ईमानदारी और जवाबदेही की आवश्यकता होती है, जो इस प्रशासन में गायब है. इस दौरान उन्होंने प्रशासन पर भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया. उनका इशारा उस IAS अधिकारी की ओर था जो कथित तौर पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं में संलिप्त पाए जाने के बाद भूमिगत हो गया है.

राज्य की नीतियों को बताया बकवास
उन्होंने दावा किया कि क्या हम सभी को यह नहीं पता कि एक IAS अधिकारी लापता है? कहा जा रहा है कि वह मुख्यमंत्री कार्यालय या आवास में छिपा हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अधिकारियों को प्रमुख पद तभी मिलते हैं जब वे मुख्यमंत्री के करीबी होते हैं. उन्होंने आगे कहा कि यह कमीशन को लेकर लड़ाई नहीं थी, बल्कि भ्रष्टाचार के पैसे के बंटवारे को लेकर लड़ाई थी. सरकार को इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि यह कब से चल रहा था. अगर एक अधिकारी भ्रष्ट है, तो कल्पना कीजिए कि इसमें कितने और लोग शामिल हैं? उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की शून्य सहनशीलता की नीति बकवास है.
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