मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सूबे में शिक्षा को लेकर गंभीर हैं. वह शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं. वह चाहते हैं कि जनता के पैसे का पूरा सदुपयोग हो और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो.
LUCKNOW: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सूबे में शिक्षा को लेकर गंभीर हैं. वह शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं. वह चाहते हैं कि जनता के पैसे का पूरा सदुपयोग हो और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो. हर विद्यालय में शिक्षक हों, जिससे पठन-पाठन सुचारु रूप से चलता रहे. उनका मानना है कि शिक्षा से ही विकसित व सभ्य समाज का सपना पूरा किया जा सकता है. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी ने शनिवार ( 22 मार्च) को अपने सरकारी आवास पर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की.
एक से 15 अप्रैल और जुलाई माह में 15 दिन का चलेगा स्कूल चलो अभियान
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार का खजाना जनता का पैसा है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है. उन्होंने निर्देश दिया कि प्रदेश का कोई भी विद्यालय शिक्षक विहीन नहीं होना चाहिए. हमारा पूरा फोकस क्वालिटी ऑफ एजुकेशन पर होना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी एक अप्रैल से 15 अप्रैल तक और जुलाई माह में 15 दिन का स्कूल चलो अभियान संचालित किया जाएगा. इस दौरान शिक्षकों, ग्राम प्रधानों व ग्राम पंचायत के सदस्यों द्वारा मिलकर इस प्रकार व्यवस्था की जाए कि यह स्कूल चलो अभियान बच्चों को एक उत्सव की भांति लगे.
शिक्षक और प्रिंसिपल घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल आने के लिए करें प्रेरित
इस दौरान बच्चों को कुछ नया अनुभव प्रतीत हो. शिक्षक और प्रिंसिपल गांव का भ्रमण करें और घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करें. उन्होंने कहा कि सभी जनपदों एवं विकास खंडों में शिक्षक-छात्र का अनुपात बेहतर रहे. सरकार हर स्थिति में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है. सभी परिषदीय विद्यालयों में बालक एवं बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था की गई है. साथ ही इन विद्यालयों में पेयजल,अच्छी फ्लोरिंग के क्लासरूम, विद्युत की सुविधा, बाउंड्रीवाल व गेट सहित अच्छे फर्नीचर उपलब्ध कराए हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार कक्षा एक से 12 तक के लिए मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों का निर्माण करा रही है. इसके लिए 26 जनपदों के लिए धनराशि जारी की जा चुकी है. इसके अलावा प्री प्राइमरी से कक्षा 8 तक के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय बनाए जा रहे हैं. 58 जनपदों में इनके निर्माण के लिए भी धनराशि निर्गत की जा चुकी है. इन दोनों प्रकार के विद्यालयों में प्लेग्राउंड, ट्रेनिंग सेंटर जिनमें क्राफ्ट, माटी कला और न्यू एज कोर्सेज की व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए.
शिक्षा में उत्तर प्रदेश अब टॉप परफॉर्मिंग स्टेट की श्रेणी में
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से प्रथम चरण में 13 डायट्स को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे डायट को एक संसाधन केंद्र के रूप में विकसित कर पाएंगे और समावेशी शिक्षा को आगे बढ़ा पाएंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किए गए समग्र प्रयासों के परिणाम आज असर (ACER) रिपोर्ट में देखे जा सकते हैं. वर्ष 2024 की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है. उत्तर प्रदेश अब टॉप परफॉर्मिंग स्टेट की श्रेणी में सम्मिलित हो गया है. 2018 से 2024 के बीच उत्तर प्रदेश में शिक्षा के स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जो प्रशंसनीय है.
प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति बढ़कर हुई 71.4 प्रतिशत
कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति वर्ष 2010 में 57 प्रतिशत थी जो वर्ष 2024 में बढ़कर 71.4 प्रतिशत हो गई है. प्रदेश में बालिकाओं का नामांकन बालकों की तुलना में अधिक है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को समर कैंप संचालित करने के लिए भी निर्देशित किया. यह समर कैंप एक से डेढ़ घंटे के होने चाहिए. इन कैंपों में बच्चों को खेल-खेल में नई चीजों को सिखाने पर बल दिया जाएगा ताकि बच्चे पढ़ाई को बोझ न समझकर मनोरंजन की तरह लें.
मुख्यमंत्री ने कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया जा रहा है. प्रदेश सरकार वर्ष 2021-22 से छात्र छात्राओं को निशुल्क यूनिफॉर्म, स्वेटर, स्कूल बैग, जूता, मोजा उपलब्ध कराने के लिए उनके अभिभावकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी के लिए 1200 रुपए भेज रही है. 25,784 परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज, 5568 आईसीटी लैब्स तथा 2 लाख 61 हजार से अधिक टैबलेट की उपलब्धता सुनिश्चित कराकर डिजिटल शिक्षा को आगे बढ़ाया जा रहा है.
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- लखनऊ से राजीव ओझा की रिपोर्ट