Micro Wedding In India : भारत में कोरोना महामारी के समय शुरू हुई माइक्रो वेडिंग का सिलसिला अब ट्रेंड बन गया है. क्या आप जानते हैं इस टर्म के बारे में, अगर नहीं तो आइए जानतें हैं.
Micro Wedding In India : भारत में शादी होना किसी उत्सव से कम नहीं होता है. ऐसा लगता है मानों किसी बड़े आयोजन की तैयारी की जा रही हो. सारे रिश्तेदार एक साथ इकट्ठे होते हैं जिनमें से बहुत से रिश्तेदार तो केवल शादी के समय ही मिलते हैं. लेकिन, कोविड-19 महामारी के बाद से अब ऐसे बड़े आयोजनों से दूरी बना रहे हैं. शादी की योजना बनाना एक बहुत बड़ा काम होता है आपको शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से थका देता है. ऐसे में आइए जानतें हैं क्या है माइक्रो वेडिंग, कब से चल रहा है इसका ट्रेंड और भारत में क्या है इसकी स्थिति.

क्या है माइक्रो वेडिंग?
माइक्रो वेडिंग एक छोटे से और इंटीमेट शादी है जिसमें दूल्हे और दुल्हन के बेहद करीबी परिवार और 50 मेहमानों को निमंत्रण दिया जाता है. ये एक फॉर्मल, कैजुअल या फिर एक कंबाइन सेलेब्रेशन हो सकता है जहां पारंपरिक शादी के एलेमेंट्स को शामिल किया जा सकता है लेकिन छोटे पैमाने पर. इसमें पैसे भी कम लगते हैं.
माइक्रो वेडिंग का चलन
माइक्रो वेडिंग का चलन भारत के साथ-साथ दुनिया के अलग-अलग देश में बड़ी तेजी से फैल रहा है. हालांकि, भारत में पारंपरिक रूप से भव्य और बड़ी शादियों का रिवाज रहा है, जहां सैकड़ों से हजारों मेहमान आमंत्रित किए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान लॉकडाउन और सामाजिक दूरी के नियमों के कारण लोग छोटे समारोहों की ओर बढ़े. तब से लेकर अभी तक इसका ट्रेंड लोगों के बीच खत्म नहीं हो रहा है.

माइक्रो वेडिंग के फायदे
जहां एक तरफ माइक्रो वेडिंग के कुछ फायदे है तो वहीं और नुकसान भी हैं. यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा विकल्प है, जो अपनी शादी और रिसेप्शन में सिर्फ अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं. आइए जानते हैं माइक्रो वेडिंग के फायदे और नुकसान.
बजट फ्रेंडली
पारंपरिक शादी की तुलना में माइक्रो वेडिंग पौकेट पॉकेट फ्रेंडली होती है. इसमें मेहमान कुछ ही होते हैं. वहीं, इस तरह की शादी में वेन्यू से लेकर खाने -पीने और निमंत्रण कार्ड समेत हर जगह पर पैसों की बचत की जा सकती है.

मेहमानों के साथ वक्त
बड़ी शादी समारोह में हर मेहमान के साथ वक्त बिताना संभव नहीं हो पाता है. इसके विपरीत माइक्रो वेडिंग में सीमित और कम मेहमान शामिल होते हैं, ऐसे में नवविवाहित जोड़ा अपने परिवार के साथ मेहमानों को भी समय दें पाते हैं. साथ ही इस तरह की शादी में मजेदार यादें और मजबूत रिश्ता बनाने का मौका मिल सकता है.
कम तनावपूर्ण
बड़े समारोहों की तुलना में छोटी शादी की व्यवस्था करना आसान होता है. उन पर समारोह को ग्रैंड बनाने का दबाव नहीं होता और खर्च भी कम होता है. इसलिए शादी की तैयारी करना और सभी मेहमानों पर ध्यान देना कम तनावपूर्ण होता है.

वेन्यू के ज्यादा विकल्प
वहीं, कम मेहमानों के बीच कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए जगह के कई ऑप्शन खुल जाते हैं. रिसाॅर्ट, कैफे, पार्क, मंदिर, रेस्तरां आदि किसी भी स्थान पर शादी का कार्यक्रम आसानी से किया जा सकता है.
माइक्रो वेडिंग के नुकसान
रिश्तेदारों की नाराजगी
माइक्रो वेडिंग एक छोटा व्यक्तिगत समारोह होता है, इसलिए कपल के लिए यह तय कर पाना मुश्किल होता है कि शादी में किसे आमंत्रित करें और किसे नहीं. उन्हें कुछ ऐसे लोगों को लिस्ट से हटाना होता है जो जरूरी हो सकते हैं. ऐसे में कई दोस्त और रिश्तेदार इससे नाराज हो जाते हैं.

भव्यता की कमी
शादी को लेकर अक्सर लड़का-लड़की या उसने माता-पिता काफी सपने देखते हैं. अगर किसी ने भव्य शादी का सपना देखा है, तो यह विकल्प थोड़ा फीका लग सकता है. जब जोड़े माइक्रो वेडिंग का विकल्प चुनते हैं, तो वे अपने इस खास दिन पर पारंपरिक धूमधाम से चूक सकते हैं.
सामाजिक दबाव
भारत में शादी को एक सामूहिक उत्सव माना जाता है, इसलिए माइक्रो वेडिंग करने पर लोगों की राय और समाज का दबाव झेलना पड़ सकता है. हालांकि, माइक्रो वेडिंग भारत में एक नया काॅन्सेप्ट है इसलिए इसे पारंपरिक शादी के खिलाफ माना जाता है, और इस तरह की शादी के लिए घर के बड़े बुजुर्गों को मनाने में मुश्किल आ सकती है.
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