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Delhi: गैस चेंबर बनी दिल्ली, करोड़ों लोगों की सांस पर संकट; सरकार ने जारी किया बड़ा निर्देश

by Divyansh Sharma
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AQI-Air Pollution In Delhi-NCR Central government issue instruction employee

AQI-Air Pollution In Delhi-NCR: स्वास्थ्य विभाग ने सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ितों की देखभाल के लिए अस्पतालों को एक टीम बनाने का निर्देश दिया है.

AQI-Air Pollution In Delhi-NCR: दिल्ली-NCR में प्रदूषण से स्थिति बेकाबू होती ही जा रही है. पूरे दिल्ली-NCR में धुंध की घनी चादर छाई है. इस बीच लोगों का सांस लेना भी मुहाल हो चुका है. लोगों में सांस संबंधी बीमारियां भी बढ़ रही हैं.

इस बीच दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा एक्शन लिया है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंगलवार (19 नवंबर) को सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की बेहतर देखभाल के लिए सभी अस्पतालों को विशेषज्ञों की एक टीम बनाने का निर्देश दिया गया है.

दिल्ली-NCR में औसत AQI पहुंचा 496

बता दें कि दिल्ली-NCR में मंगलवार को औसत AQI यानी 496 तक पहुंच गया. यह प्रदूषण के ‘गंभीर प्लस यानी ज्यादा गंभीर’ श्रेणी को दर्शाता है.

CPCB यानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समीर ऐप के मुताबिक मंगलवार को 32 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 31 ने AQI का स्तर 480 से ज्यादा दर्ज किया है.

वहीं, 15 स्टेशनों पर यह 500 तक पहुंच गया. बता दें कि CPCB सिर्फ 500 तक ही AQI दिखा सकता है. ऐसे में अगर प्रदूषण स्तर 500 से ज्यादा ज्यादा हो जाता है, तो जहरीली हवा का सटीक स्तर तय नहीं किया जा सकता है. CPCB के मुताबिक यह स्थिति पिछले छह साल में सबसे खराब है.

कई इलाकों में AQI के 480 से ज्यादा होने पर लोगों ने कई तरह की शिकायतें दर्ज कराई. लोगों ने आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और लगातार खांसी जैसी शिकायतों का जिक्र किया है.

यह भी पढ़ें: Delhi में GRAP की पाबंदियों का नहीं दिखा असर! हरियाणा-राजस्थान में भी बिगड़े हालात

COEH करेगा इस मामले की निगरानी

इस तरह के हालातों को देखते हुए अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों को शहर में गंभीर वायु प्रदूषण से जुड़ी सांस की बीमारी से पीड़ित मरीजों से निपटने के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाने का निर्देश दिया है.

साथ ही उन्हें इस तरह के मामलों की लगातार निगरानी करने और रिपोर्ट करने का भी निर्देश दिया है. विभाग ने यह भी कहा है कि किसी अस्पताल में अगर मरीजों की संख्या में अगर बढ़ोतरी होती है, तो तुरंत इसे मार्क करें.

सभी अस्पतालों के अधिकारियों को हर दिन की रिपोर्ट COEH यानी सेंटर फॉर ऑक्यूपेशनल एंड एनवायर्नमेंटल हेल्थ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गोविंद मावारी को ई-मेल करनी होगी. COEH इस मामले पर निगरानी करेगा और पूरे रिपोर्ट पर अपने सुझाव भी देगा.

यह भी पढ़ें: Delhi में वायु प्रदूषण बेकाबू! लागू हुआ GRAP-4, जानें राजधानी में क्या-क्या लगी पाबंदियां?

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