पढ़ें सबा अकबराबादी के बेहतरीन शेर जो जेहन में उतर जाए.

समझेगा आदमी को वहां कौन आदमी, बंदा जहां खुदा को खुदा मानता नहीं.

समझेगा आदमी

इक रोज छीन लेगी हमीं से जमीं हमें, छीनेंगे क्या जमीं के खजाने जमीं से हम.

हमीं से जमीं

आप के लब पे और वफा की कसम, क्या कसम खाई है खुदा की कसम.

कसम खाई

गलत-फहमियों में जवानी गुजारी, कभी वो न समझे कभी हम न समझे.

गलत-फहमियों

सौ बार जिस को देख के हैरान हो चुके, जी चाहता है फिर उसे इक बार देखना.

सौ बार

आप आए हैं सो अब घर में उजाला है बहुत, कहिए जलती रहे या शम्अ बुझा दी जाए.

घर में उजाला