'ये और बात तेरी गली में न आएं हम...' पढ़ें हबीब जालिब के सदाबहार शेर.

जिन की यादों से रौशन हैं मेरी आंखें, दिल कहता है उन को भी मैं याद आता हूं.

रौशन हैं मेरी

 इक तिरी याद से इक तेरे तसव्वुर से हमें, आ गए याद कई नाम हसीनाओं के.

तेरे तसव्वुर

 इक तिरी याद से इक तेरे तसव्वुर से हमें, आ गए याद कई नाम हसीनाओं के.

तेरे तसव्वुर

 और सब भूल गए हर्फ-ए-सदाकत लिखना, रह गया काम हमारा ही बगावत लिखना.

हर्फ-ए-सदाकत

न तेरी याद न दुनिया का गम न अपना खयाल, अजीब सूरत-ए-हालात हो गई प्यारे.

दुनिया का गम

ये और बात तेरी गली में न आएं हम, लेकिन ये क्या कि शहर तिरा छोड़ जाएं हम.

तेरी गली

अपनी तो दास्तां है बस इतनी, गम उठाए हैं शाएरी की है.

अपनी तो दास्तां