'काबा किस मुंह से जाओगे 'गालिब'...' पढ़ें मिर्जा गालिब के दिल जीत लेने वाले शेर.

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हमारी खबर

काबा किस मुंह से जाओगे 'गालिब', शर्म तुम को मगर नहीं आती.

शर्म तुम

हुआ है शह का मुसाहिब फिरे है इतराता, वगरना शहर में 'गालिब' की आबरू क्या है.

मुसाहिब फिरे

मौत का एक दिन मुअय्यन है, नींद क्यूं रात भर नहीं आती.

एक दिन

इशरत-ए-कतरा है दरिया में फना हो जाना, दर्द का हद से गुजरना है दवा हो जाना.

इशरत-ए-कतरा